पहाड़ों पर फिर लौटेगी बर्फ, बैक-टू-बैक पश्चिमी विक्षोभ देंगे दस्तक, जानें कहां और कब होगी बर्फबारी?

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Mar 2, 2026, 3:30 PM
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पहाड़ी राज्यों बारिश और बर्फबारी, फोटो: ANI

मुख्य मौसम बिंदु

  • फरवरी 2026 में उत्तराखंड में 94% तक वर्षा की कमी।
  • जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी भारी बारिश घाटा।
  • 3 से 12 मार्च के बीच दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय।
  • ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से तापमान में अस्थायी राहत।

साल 2026 की सर्दियों में उत्तर भारत के पहाड़ों पर बेहद कम बारिश और बर्फबारी दर्ज की गई। खासकर फरवरी, जो आमतौर पर सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना माना जाता है, इस बार लगभग सूखा ही रहा।उत्तराखंड में फरवरी के दौरान 94% तक बारिश की कमी दर्ज की गई। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 89% तथा हिमाचल प्रदेश में 86% वर्षा की कमी रही। बर्फबारी कम होने से पूरे क्षेत्र में तापमान बढ़ा है और इसका असर आने वाले मौसमों पर भी पड़ सकता है।

दो पश्चिमी विक्षोभ देंगे अस्थायी राहत

अगले 10 दिनों में पश्चिमी हिमालय पर दो पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) आने वाले हैं। इनमें से दूसरा सिस्टम ज्यादा मजबूत, विस्तृत और लंबे समय तक असर डालने वाला होगा। हालांकि ये सिस्टम कुछ समय के लिए राहत देंगे, लेकिन मार्च के दूसरे पखवाड़े में फिर से मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

पहला सिस्टम 3 मार्च से, असर ऊंचाई वाले इलाकों तक सीमित

पहला पश्चिमी विक्षोभ 3 मार्च 2026 की देर रात पहुंचेगा और 5 मार्च तक सक्रिय रहेगा। 6 मार्च को इसका हल्का असर रह सकता है। इस दौरान मौसम गतिविधियां मुख्य रूप से 10,000 फीट से ऊपर के इलाकों तक सीमित रहेंगी। काराकोरम, लद्दाख-ज़ांस्कर, पीर पंजाल और शिवालिक पर्वत श्रृंखलाओं में छिटपुट बर्फबारी हो सकती है। निचले पहाड़ी इलाकों में इस सिस्टम का खास असर नहीं दिखेगा।

दूसरा सिस्टम ज्यादा असरदार, 7 से 12 मार्च तक सक्रिय

दूसरा पश्चिमी विक्षोभ 7 मार्च से पहुंचेगा और 12 मार्च तक मौसम गतिविधियों को बढ़ावा देगा। यह सिस्टम मैदानी इलाकों की सहायक हवाओं के कारण ज्यादा मजबूत होगा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मौसम में एक साथ बदलाव देखने को मिलेगा। श्रीनगर, मनाली और शिमला में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें हो सकती हैं। वहीं पहलगाम, गुलमर्ग, सोनमर्ग, रोहतांग और लाहौल-स्पीति जैसे पर्यटन स्थलों पर 7 और 8 मार्च को बर्फबारी की संभावना है। पहाड़ों में बढ़ती गर्मी से कुछ राहत मिलेगी, लेकिन महीने के दूसरे हिस्से में फिर से तापमान बढ़ सकता है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

उत्तराखंड में 94%, जम्मू-कश्मीर में 89% और हिमाचल प्रदेश में 86% तक कमी दर्ज हुई।

पहला पश्चिमी विक्षोभ 3–5 मार्च और दूसरा 7–12 मार्च के बीच असर डालेगा।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे गुलमर्ग, पहलगाम, रोहतांग और लाहौल-स्पीति में बर्फबारी संभव है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है