Delhi Weather Update: दिल्ली-एनसीआर में बारिश के आसार, अप्रैल की शुरुआत तक नहीं पड़ेगी हीट वेव
मुख्य मौसम बिंदु
- मार्च की शुरुआत में तेज गर्मी, बाद में मौसम में बदलाव
- पश्चिमी विक्षोभ से बारिश और ठंडी हवाएं
- तापमान में गिरावट, सुहावना मौसम
- अप्रैल के पहले हफ्ते तक हीट वेव नहीं
दिल्ली में मार्च की शुरुआत सामान्य से काफी ज्यादा गर्म रही। मार्च के पहले आधे हिस्से में अधिकतम तापमान सामान्य से 5–7 डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया गया। 11 मार्च को तापमान 36.8°C तक पहुंच गया, जिससे यह आशंका बढ़ गई कि इस बार हीट वेव जल्दी शुरू हो सकती है।
मौसम में अचानक बदलाव, मिली राहत
मार्च के मध्य के बाद मौसम ने अचानक करवट ली। शुरुआत में कमजोर रहने वाले पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) सक्रिय हो गए। इसके कारण हवाओं की दिशा बदलकर पूर्वी (Easterlies) हो गई है। वातावरण में नमी बढ़ गई और तापमान में अच्छी-खासी गिरावट दर्ज की गई है। 15 मार्च को दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर-पश्चिम भारत में हुई बारिश ने गर्मी से राहत दिलाई थी।
प्री-मानसून गतिविधियाँ जारी
इसके बाद लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के कारण मौसम में हलचल बनी रही। इनकी वजह से मध्य पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत में चक्रवाती परिसंचरण बने थे। जिस कारण बार-बार आँधी, बारिश और धूल भरी आंधी देखने को मिली थी। इसके साथ ही तापमान सामान्य से नीचे बना रहा है। 21 मार्च को दिल्ली का अधिकतम तापमान गिरकर 21.7°C पहुंच गया, जो इस सीजन के सबसे ठंडे दिनों में से एक रहा है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
गौरतलब है, दिल्ली-एनसीआर में मौसम की गतिविधियाँ अभी खत्म नहीं हुई हैं। आने वाले दिनों में दो पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय होंगे। जिसमें पहला सिस्टम 26 मार्च के आसपास और दूसरा सिस्टम 28 मार्च की रात के आसपास एक्टिव होगा। इनकी वजह से दिल्ली और एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिम भारत में प्री-मानसून गतिविधियाँ जारी रहेंगी।
क्या आएगी हीट वेव?
अगले 2–3 दिनों में दिल्ली-एनसीआर के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन तापमान हीट वेव की स्थिति तक नहीं पहुंचेगा। कम से कम अप्रैल के पहले हफ्ते तक हीट वेव की संभावना नहीं है। दिल्ली के लोगों के लिए मार्च का अंत सुहावना रहने वाला है। बीच-बीच में बारिश, आँधी और ठंडी हवाएं मौसम को आरामदायक बनाए रखेंगी। अच्छी खबर यह है कि इस बार जल्दी आने वाली हीट वेव का खतरा फिलहाल टल गया है, जिसका श्रेय सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों को जाता है।







