Monsoon Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार धीमी, जून के पहले सप्ताह में देशभर में 22% कम बारिश
मुख्य मौसम बिंदु
- मानसून सिंधुदुर्ग तक पहुंच चुका है।
- जून में वर्षा सामान्य से 22% कम दर्ज की गई।
- दक्षिण भारत के आंतरिक क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां कमजोर ।
- मानसून की आगे की प्रगति धीमी पड़ सकती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 4 जून 2026 को केरल में दस्तक दी थी। इसके बाद मानसून की अरब सागर शाखा पश्चिमी तट के साथ तेजी से आगे बढ़ी और निर्धारित समय से थोड़ा पहले दक्षिण कोंकण के सिंधुदुर्ग क्षेत्र तक पहुंच गई। इसी दौरान मानसून तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा के कुछ हिस्सों को भी कवर कर चुका है। पूर्वोत्तर भारत में भी मानसून ने अच्छी प्रगति की है और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा अरुणाचल प्रदेश और असम के पूर्वी क्षेत्रों तक पहुंच गया है। हालांकि पश्चिमी घाटों के साथ मानसून की गतिविधियाँ मजबूत रहीं, लेकिन तमिलनाडु, आंतरिक कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के अंदरूनी हिस्सों में इसकी गति धीमी रही। इसी कारण जून के पहले सप्ताह में देशभर में मानसूनी बारिश सामान्य से 22 प्रतिशत कम दर्ज की गई।
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश की कमी, मानसून की प्रगति पर असर
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में मानसून कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। लेकिन सामान्य तौर पर किसी भी क्षेत्र में मानसून के आगे बढ़ने से पहले 2 से 3 दिनों तक मध्यम स्तर की प्री-मानसून गतिविधियां देखी जाती हैं। इस बार ऐसी गतिविधियां अपेक्षा से कमजोर रही हैं। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत, जहां मानसून काफी बड़े क्षेत्र में पहुंच चुका है, वहां भी जून के पहले सप्ताह में 3 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। केरल, तटीय कर्नाटक और गोवा में भारी बारिश होने के बावजूद दक्षिण भारत के आंतरिक क्षेत्रों में बारिश कम होने से मानसून की स्थिति उतनी मजबूत नहीं दिखाई दे रही है। यह दर्शाता है कि मानसून की प्रगति तो हुई है, लेकिन इसके साथ जुड़ी भारी वर्षा अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुई है।
बंगाल की खाड़ी में सिस्टम की कमी से मानसून की रफ्तार पर ब्रेक
केरल में मानसून का आगमन मुख्य रूप से अरब सागर शाखा के प्रभाव से होता है। लेकिन कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में सक्रिय मानसूनी परिस्थितियाँ बनने के लिए बंगाल की खाड़ी में किसी प्रभावी मौसम प्रणाली का होना बेहद जरूरी होता है। फिलहाल बंगाल की खाड़ी में ऐसा कोई मजबूत सिस्टम बनने के संकेत नहीं हैं, जो मानसून की रफ्तार को दक्षिण और मध्य भारत की ओर बढ़ा सके। हालांकि 10 और 11 जून के दौरान कोंकण तट से लेकर उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश तक महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के ऊपर एक पूर्व-पश्चिम द्रोणिका बनने की संभावना है। इसके दोनों ओर प्री-मानसून बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं, लेकिन इन्हें मानसूनी बारिश नहीं माना जाएगा। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों में मानसून को आगे बढ़ाने के लिए एक नए और मजबूत मानसूनी दौर की आवश्यकता होगी। सामान्यतः जून के पहले सप्ताह में देश में औसत दैनिक बारिश लगभग 3 मिमी, दूसरे सप्ताह में 4 मिमी और महीने के मध्य से 5 मिमी या उससे अधिक हो जाती है। देशभर में प्रतिदिन 5 से 6 मिमी वर्षा के स्तर तक पहुंचने के लिए सक्रिय मानसूनी परिस्थितियां आवश्यक हैं। इसलिए मानसून को निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ाने के लिए बंगाल की खाड़ी में एक प्रभावी मौसम प्रणाली का बनना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें: मुंबई में मानसून की दस्तक में देरी, उमस और गर्मी से बेहाल लोग, जानिए बारिश और मानसून आगमन की नई तारीख
यह भी पढ़ें: दिल्ली-एनसीआर में अगले 3 दिन झुलसाएगी लू और गर्मी, जानिए आँधी और प्री-मानसून बारिश का पूरा पूर्वानुमान







