जून में देशभर में सामान्य से 40% कम बारिश, जुलाई से मानसून करेगा दमदार वापसी, तेज बारिश के संकेत

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jul 1, 2026, 5:00 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • जून 2026 में पूरे भारत में सामान्य से 40% कम बारिश हुई।
  • यह 2014 के बाद जून महीने की सबसे कम वर्षा रही।
  • जुलाई के पहले पखवाड़े में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
  • निम्न दबाव, मानसूनी द्रोणी, ऑफ-शोर ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ बारिश बढ़ाएंगे।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम विश्लेषण और पूर्वानुमान 2 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक की अवधि के लिए मान्य है।

जून 2026 का महीना मानसून के लिहाज से बेहद निराशाजनक रहा। देश के सभी चार प्रमुख मौसम क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। पूरे भारत में जून के दौरान 99.5 मिमी वर्षा हुई, जबकि इस महीने का सामान्य औसत 165.3 मिमी है। यानी देशभर में 40% बारिश की कमी रही। यह 2014 के बाद जून महीने की सबसे कम वर्षा है।

यदि पिछले वर्षों की बात करें तो 2009 में जून के दौरान केवल 87.6 मिमी बारिश हुई थी, जो अब तक का सबसे कम रिकॉर्ड है। उस वर्ष देश में अल नीनो के कारण सूखे जैसी स्थिति बनी थी और जून में 52% वर्षा की कमी दर्ज हुई थी। हालांकि इसके बाद जुलाई में बारिश सामान्य रही थी। वहीं 2014, जो एक सूखा वर्ष माना जाता है, उसमें जून में 92.8 मिमी बारिश हुई थी और 43% की कमी रही थी। जुलाई 2014 में भी सामान्य से 10% कम बारिश हुई थी। इसके विपरीत 1997, जो अल नीनो वर्ष था, उसमें पूरे मानसून सीजन के दौरान सामान्य से 102% वर्षा हुई थी और जून में ही सामान्य से 10% अधिक बारिश दर्ज की गई थी। इससे स्पष्ट है कि केवल अल नीनो के आधार पर पूरे मानसून का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

जून में बारिश कम होने के पीछे कई मौसमीय कारण रहे

जून 2026 में बारिश की कमी के पीछे कई अहम मौसमीय कारण रहे। सबसे बड़ा कारण यह रहा कि बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम विकसित नहीं हुआ, जबकि सामान्यतः यही सिस्टम देशभर में मानसून को आगे बढ़ाने और बारिश बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके अलावा मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) भी भारतीय समुद्री क्षेत्रों के लिए अनुकूल स्थिति में नहीं रहा, जिससे मानसूनी हवाओं को पर्याप्त मजबूती नहीं मिल सकी। इसी दौरान अल नीनो चक्र की शुरुआत ने भी भारतीय महासागरों के ऊपर मानसून के प्रवाह को कमजोर किया। वहीं दक्षिण भारत के ऊपरी वायुमंडल में बनने वाली ट्रॉपिकल ईस्टरली जेट, जो मानसून को मजबूत करने में अहम मानी जाती है, पूरे जून महीने में लगभग अनुपस्थित रही। इन सभी कारणों ने मिलकर जून में बारिश को कमजोर बनाए रखा।

जुलाई से बढ़ी उम्मीदें, 10 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच सकता है मानसून

अब उम्मीदें जुलाई महीने पर टिकी हैं, खासकर किसानों के लिए। जुलाई के पहले पखवाड़े में देश के कई हिस्सों, विशेषकर मानसूनी वर्षा पर निर्भर कृषि क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि जून में कम बारिश के कारण बुवाई प्रभावित हुई थी।

मौसमीय परिस्थितियां अब धीरे-धीरे अनुकूल बन रही हैं। उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके साथ ही इंडो-गंगा के मैदानी इलाकों में मानसूनी द्रोणी (सीजनल ट्रफ) सक्रिय रहेगी और पश्चिमी घाट के साथ ऑफ-शोर ट्रफ भी बारिश को बढ़ावा देगी। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ भी मानसूनी हवाओं को देश के शेष हिस्सों तक पहुंचाने में मदद करेगा। इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से 10 जुलाई 2026 या उससे पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूरे देश को कवर करने की संभावना है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

जून 2026 में पूरे भारत में सामान्य से लगभग 40% कम बारिश दर्ज की गई।

बंगाल की खाड़ी में मानसूनी सिस्टम का न बनना, MJO का अनुकूल न होना, एल नीनो की शुरुआत और ट्रॉपिकल ईस्टरली जेट का कमजोर रहना इसके प्रमुख कारण रहे।

मौजूदा मौसमीय परिस्थितियों के अनुसार 10 जुलाई 2026 या उससे पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूरे देश को कवर करने की संभावना है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है