पश्चिमी विक्षोभ की रफ्तार धीमी, असर पहाड़ों तक सीमित, मैदानों में बारिश के आसार कम
मुख्य मौसम बिंदु
- जनवरी में पश्चिमी विक्षोभ रहे मजबूत, हुई भारी बर्फबारी
- फरवरी में सिस्टम कमजोर, असर सीमित इलाकों तक
- 8–10 दिन मैदानी क्षेत्रों में बारिश की संभावना कम
- सर्दियों की वर्षा और बर्फबारी का वितरण असमान
जनवरी महीने में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) काफी सक्रिय रहे, जिसके कारण जोरदार मौसम गतिविधियां देखने को मिलीं। पहला मजबूत सिस्टम लगभग 23 जनवरी के आसपास पहुंचा, जिसने पूरे पश्चिमी हिमालय को भारी बर्फबारी से ढक दिया और क्षेत्र को पूरी तरह से सर्दियों के रंग में रंग दिया। इसके तुरंत बाद 27 जनवरी को एक और पश्चिमी विक्षोभ आया, जिसने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और आसपास के इलाकों में मध्यम से भारी बारिश और बर्फबारी कराई। इन लगातार आने वाले सिस्टमों ने इस क्षेत्र में सर्दियों के मौसम की चरम गतिविधि को दर्शाया।
नया सिस्टम भी रहेगा सीमित असर वाला
लेकिन इसके बाद से पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता में काफी कमी देखी गई है। फरवरी के पहले चार दिनों के दौरान केवल हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों और लद्दाख के कुछ हिस्सों में ही दर्ज की गई, जो स्पष्ट रूप से सिस्टम के कमजोर पड़ने का संकेत है। अब 9 फरवरी को एक नया पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है, पर इसका असर मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद और हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों तक ही सीमित रहने की संभावना है। उत्तराखंड में इसका असर बहुत कम रहेगा और केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इस सिस्टम के गुजरने के बाद 11 या 12 फरवरी से मौसम के शुष्क होने की उम्मीद है। अगला पश्चिमी विक्षोभ लगभग 16 फरवरी के आसपास आ सकता है, लेकिन वह भी कमजोर ही रहेगा और पहाड़ों पर किसी बड़ी बारिश या बर्फबारी की संभावना नहीं दिखती।
सर्दियों की वर्षा-बर्फबारी का असमान वितरण
कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का एक बड़ा असर यह होता है कि वे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulation) नहीं बना पाते। इसी कारण पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में अगले 8–10 दिनों तक बारिश की संभावना बहुत कम है और लंबे शुष्क दौर की स्थिति बनती दिख रही है। 8 फरवरी तक के आंकड़े बताते हैं कि सर्दियों की बारिश और बर्फबारी का वितरण असमान रहा है। लद्दाख में सामान्य से 19% अधिक वर्षा/बर्फबारी हुई है, हिमाचल प्रदेश में 47% अधिक दर्ज की गई है, जबकि जम्मू-कश्मीर में 33% की कमी और उत्तराखंड में 21% की कमी बनी हुई है। यानी कुछ तेज दौर आने के बावजूद पूरे पश्चिमी हिमालय को इस सर्दी में उसका सामान्य हिस्सा नहीं मिल पाया। पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ते रुझान को देखते हुए सर्दी के बाकी हिस्से में भी बड़ी वर्षा या बर्फबारी की संभावना कम नजर आ रही है।
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