राजस्थान से विदर्भ तक भीषण गर्मी, पश्चिम और मध्य भारत में 40°C के पार तापमान
मुख्य मौसम बिंदु
- राजस्थान के बाड़मेर में 9 मार्च को तापमान 40°C दर्ज, हीटवेव की शुरुआत।
- अकोला, पिलानी और सोलापुर में भी तापमान 40°C के आसपास पहुंचा।
- साफ आसमान, शुष्क हवाएं और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ से गर्मी बढ़ी।
- अगले 2–3 दिनों तक राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में गर्मी बनी रह सकती है।
मार्च का पहला सप्ताह देश के कई हिस्सों में असामान्य रूप से गर्म रहा है। खासकर दक्षिण राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया है। मार्च की शुरुआत में ही तापमान में अचानक बढ़ोत्तरी ने समय से पहले गर्मी आने की चिंता बढ़ा दी है। 9 मार्च को राजस्थान के बाड़मेर में अधिकतम तापमान 40°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 6.5°C ज्यादा है। तकनीकी रूप से यहां हीटवेव की स्थिति शुरू हो चुकी है।
कई शहरों में 40°C के करीब या उससे अधिक तापमान
देश के कई अन्य शहरों में भी तापमान 40°C के आसपास या उससे अधिक दर्ज किया गया। विदर्भ के अकोला में अधिकतम तापमान 40.9°C रिकॉर्ड किया गया। वहीं, राजस्थान के पिलानी में 40.2°C और महाराष्ट्र के सोलापुर में भी 40.2°C तापमान दर्ज हुआ। गुजरात के राजकोट और सुरेंद्रनगर जैसे शहरों में भी तापमान 40°C के करीब पहुँच गया है। दिल्ली में भी असामान्य गर्मी देखने को मिली है, जहां अधिकतम तापमान 35.6°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 7.2°C अधिक है। मार्च के पहले दस दिनों में इतना अधिक तापमान पिछले 15 वर्षों में बहुत कम देखने को मिला है।
समय से पहले गर्मी बढ़ने के प्रमुख कारण
पश्चिम और मध्य भारत में तापमान बढ़ने के पीछे कई मौसम संबंधी कारण हैं। पिछले कुछ दिनों से देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम बहुत शुष्क बना हुआ है। आसमान साफ रहने से दिन के समय सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन तक पहुंच रही हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है। बादलों की कमी के कारण सौर विकिरण अधिक प्रभावी हो रहा है और दिन का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसके अलावा पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के हिस्सों में फैल रही हैं। ये हवाएं शुष्क क्षेत्रों से गर्म हवा लेकर आ रही हैं, जिससे राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गर्मी और बढ़ रही है।
एंटी-साइक्लोन और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ भी जिम्मेदार
पश्चिमी राजस्थान के ऊपर एक एंटी-साइक्लोन बना हुआ है, जो भी तापमान बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एंटी-साइक्लोन के कारण हवा नीचे की ओर दबती है, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया रुक जाती है और आसमान साफ रहता है। इसका सीधा असर तापमान में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई देता है। इसके अलावा इस मौसम में पश्चिमी विक्षोभ की संख्या और तीव्रता भी कम रही है। सामान्यतः मजबूत पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी लाते हैं, जिससे उत्तर भारत के तापमान को संतुलन मिलता है। लेकिन इस सर्दी में पश्चिमी हिमालय में बहुत कम बर्फबारी हुई और उत्तरी मैदानी इलाकों में लगभग बारिश नहीं हुई। नमी और वर्षा की कमी के कारण मौसम शुष्क बना रहा, जिससे तापमान तेजी से बढ़ने लगा।
अगले कुछ दिनों तक राहत की उम्मीद कम
मौसम मॉडलों के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में तापमान में कोई बड़ी गिरावट आने की संभावना नहीं है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य भारत के आसपास के कई इलाकों में दिन का तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना रह सकता है। राजस्थान, गुजरात और विदर्भ के कुछ हिस्सों में पहले ही हीटवेव जैसी स्थिति दर्ज की जा चुकी है और फिलहाल इन क्षेत्रों में गर्मी का असर बना रह सकता है। कुल मिलाकर मौजूदा मौसम पैटर्न यह संकेत देता है कि पश्चिम और मध्य भारत में गर्मी इस बार सामान्य से पहले ही दस्तक दे चुकी है, जिसका मुख्य कारण लगातार शुष्क मौसम, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और क्षेत्र में बने उच्च दबाव के सिस्टम हैं।
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