बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में तेज होगी मानसूनी बारिश
उत्तर बंगाल की खाड़ी पर बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से उसी क्षेत्र में एक निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बन गया है। यह इस मानसून सीजन में भारतीय समुद्री क्षेत्र में बनने वाला दूसरा मानसूनी सिस्टम है। यह सिस्टम अगले 4 से 5 दिनों तक पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा, लेकिन पूरी तरह अंदरूनी इलाकों में जाने के बजाय समुद्र और जमीन के बीच ही सक्रिय रहेगा। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण मध्य क्षोभमंडल (Mid Troposphere) तक फैला हुआ है और इसका प्रभाव बांग्लादेश, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल और तटीय ओडिशा तक देखा जा रहा है। फिलहाल इसके देश के मध्य भागों तक पहुंचने की संभावना नहीं है और यह मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार के आसपास ही बना रहेगा।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में होगी अच्छी बारिश, कई राज्यों में भारी वर्षा का दौर
इस समय पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मौसमी बारिश की बड़ी कमी बनी हुई है। ऐसे में यह नया निम्न दबाव क्षेत्र इन इलाकों के लिए राहत लेकर आ सकता है। इसके प्रभाव से अगले कई दिनों तक अच्छी मानसूनी बारिश होने की संभावना है, जिससे वर्षा की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। अगले एक सप्ताह या उससे अधिक समय तक पूर्वोत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में बारिश और गरज-चमक के साथ वर्षा होगी। कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है। 15 से 17 जुलाई के बीच तटीय और आंतरिक ओडिशा तथा गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 18 जुलाई को भारी बारिश का क्षेत्र उत्तर बंगाल और उत्तर बिहार तक पहुंचेगा। वहीं 19 से 22 जुलाई के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड के अधिकांश हिस्सों में भी अच्छी बारिश होने के आसार हैं।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय रहेगा मानसून
18 से 21 जुलाई के बीच यह चक्रवाती परिसंचरण मुख्य रूप से जमीन पर सक्रिय रहेगा। इसके बाद 22 जुलाई से यह सिस्टम फिर से संगठित हो सकता है, हालांकि इसका प्रभाव उसी क्षेत्र तक सीमित रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह निम्न दबाव क्षेत्र सामान्य मानसूनी सिस्टम की तरह व्यवहार नहीं कर रहा है। आमतौर पर ऐसे सिस्टम तेजी से आगे बढ़ते हैं, लेकिन यह कई दिनों तक एक ही क्षेत्र में बना रह सकता है, जो मानसून के दौरान असामान्य स्थिति मानी जाती है।
इस सिस्टम के कारण पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून फिर से सक्रिय होगा और अच्छी बारिश मिलेगी। लेकिन देश के मध्य, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी हिस्सों में मानसून कमजोर बना रहेगा। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी दूर होने की संभावना फिलहाल कम है। बल्कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में वर्षा की कमी और बढ़ सकती है। इस समय 85° पूर्वी देशांतर (85°E) के पूर्व और पश्चिम हिस्सों के मौसम में साफ अंतर देखने को मिलेगा। जहां पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून सक्रिय से लेकर बेहद सक्रिय रहेगा, वहीं देश के बाकी हिस्सों में मानसून कमजोर बना रहेगा।
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