एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव, पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी के आसार, जानें पूरा मौसम अपडेट
मुख्य मौसम बिंदु
- फरवरी में पश्चिमी विक्षोभ बार-बार आते हैं लेकिन जल्दी निकल जाते हैं
- 5 और 8 फरवरी को दो पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेंगे
- 9–10 फरवरी को पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी की संभावना
- मैदानी इलाकों में छिटपुट और अल्पकालिक बारिश के बाद मौसम साफ
फरवरी महीने में पश्चिमी विक्षोभों की आवृत्ति यानी बार-बार आने की प्रवृत्ति ज्यादा होती है। हालांकि, इन मौसम प्रणालियों की अवधि कम होती है और ये कम समय में आगे बढ़ जाती हैं। पहाड़ी इलाकों में मौसम गतिविधियों की सफाई भी तेजी से हो जाती है। इस दौरान पश्चिमी विक्षोभ का मार्ग (ट्रैक) अक्षांश में नीचे की ओर खिसक जाता है, जिससे उत्तरी मैदानों और खासकर पहाड़ी राज्यों की तलहटी वाले इलाकों में बारिश बढ़ जाती हैं। साथ ही, 200 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार वाली वेस्टरली जेट स्ट्रीम नियमित रूप से सक्रिय रहती है, जो कई बार मौसम गतिविधियों को ट्रिगर भी करती है।
उत्तरी पहाड़ों से गुजरेंगे दो पश्चिमी विक्षोभ
आने वाले दिनों में उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों से होकर दो पश्चिमी विक्षोभ तेजी से गुजरने की संभावना है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों में इनका असर हल्का से मध्यम ही रहने की उम्मीद है और बड़े पैमाने पर किसी तरह की जनजीवन या सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना नहीं है। मैदानी इलाकों में भी किसी बड़ी मौसम गतिविधि की आशंका कम है, लेकिन तापमान, हवाओं और कुछ स्थानों पर हल्की और अल्पकालिक बारिश के रूप में इनके संकेत जरूर देखने को मिल सकते हैं।
पहला पश्चिमी विक्षोभ: 5 से 7 फरवरी 2026
पहला पश्चिमी विक्षोभ 05 फरवरी 2026 की रात को उत्तरी भारत पहुंचेगा। इस सिस्टम को मैदानों में किसी भी द्वितीयक या सहायक सिस्टम का समर्थन नहीं मिलेगा। 05 फरवरी को मौसम गतिविधि केवल ऊंचाई वाले इलाकों तक ही सीमित रहेगी। 06 फरवरी को इसका असर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में देखने को मिलेगा। हालांकि, इसका फैलाव और तीव्रता ज्यादा नहीं होगी। उत्तराखंड में सबसे कम मौसम गतिविधि की संभावना है। यहां तक कि पहाड़ी राज्यों की तलहटी वाले इलाके भी किसी उल्लेखनीय मौसम बदलाव से बचे रह सकते हैं और केवल बादल छाए रहने की स्थिति बन सकती है। पूरे क्षेत्र में 07 फरवरी से मौसम साफ होने की संभावना है।
दूसरा पश्चिमी विक्षोभ होगा ज्यादा प्रभावशाली
दूसरा पश्चिमी विक्षोभ 08 फरवरी 2026 की रात को पहुंचेगा और यह पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत होगा। इसके साथ ही मैदानों में एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण (Induced Cyclonic Circulation) भी बनने की संभावना है। ये दोनों सिस्टम एक-दूसरे को मजबूत करेंगे, जिससे मौसम गतिविधियों का दायरा और तीव्रता बढ़ जाएगी। 09 और 10 फरवरी 2026 को पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। 11 फरवरी को इसका शेष असर केवल ऊंचाई वाले इलाकों तक सीमित रहेगा। इस सिस्टम से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जबकि उत्तराखंड में इसका असर अपेक्षाकृत कम रहेगा।
मैदानों में छिटपुट बारिश, 20 फरवरी तक मौसम रहेगा शुष्क
09 और 10 फरवरी 2026 को मौसम गतिविधियां पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों को प्रभावित कर सकती हैं। सिस्टम का बाहरी प्रभाव पूर्वोत्तर राजस्थान, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश, उत्तर मध्य प्रदेश और दिल्ली क्षेत्र तक देखने को मिल सकता है। हालांकि, बारिश छिटपुट होगी और इसकी अवधि बहुत कम रहेगी। 11 फरवरी 2026 की देर शाम तक मैदानी इलाकों में मौसम साफ होने की उम्मीद है। इसके बाद पहाड़ों और मैदानों दोनों में 20 फरवरी 2026 तक मौसम गतिविधियों से ब्रेक मिलने की संभावना है और मौसम शुष्क बना रहेगा।
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