कृषि में क्रांति: 6 अरब डॉलर का बासमती निर्यात, डॉ. अशोक कुमार सिंह के शोध से मिली वैश्विक पहचान

By: Arti Kumari | Edited By: Mohini Sharma
Feb 26, 2026, 8:00 AM
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अपनी विकसित धान की फसल के साथ डा. अशोक कुमार सिंह

मुख्य बिंदु

  • डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया।
  • पुसा बासमती किस्मों से 6 अरब डॉलर का निर्यात।
  • 25 लाख हेक्टेयर में उन्नत बासमती की खेती।
  • किसानों की आय, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार।

भारत के कृषि अनुसंधान जगत के लिए यह गर्व का क्षण है। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पौध आनुवंशिकीविद् (Senior Plant Geneticist) डॉ. अशोक कुमार सिंह को बासमती चावल के क्षेत्र में उनके क्रांतिकारी योगदान और किसानों की समृद्धि बढ़ाने के लिए देश के उच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान भारतीय कृषि विज्ञान की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करता है।

बासमती चावल और वैज्ञानिक क्रांति

बासमती चावल एक प्रीमियम, सुगंधित और लंबे दाने वाली किस्म है, जिसे भारत में जीआई (Geographical Indication) टैग प्राप्त है। यह हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों सहित इंडो-गंगेटिक मैदानों में उगाया जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में वैज्ञानिक अनुसंधान और संकरण तकनीकों के जरिए ऐसी उन्नत किस्में विकसित की गईं, जिनमें अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, खरपतवारनाशी सहनशीलता और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता शामिल है।

पुसा बासमती किस्मों से 6 अरब डॉलर का निर्यात

डॉ. सिंह द्वारा विकसित पुसा बासमती 1121 (दुनिया का सबसे लंबा और पतला दाना) और पुसा बासमती 1509 (कम समय में पकने वाली और अर्ध-बौनी किस्म) जैसी किस्में आज 25 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोई जाती हैं। इनसे हर साल लगभग 1 करोड़ टन उत्पादन होता है और 6 अरब डॉलर का निर्यात संभव हुआ है, जो भारत की कुल कृषि विदेशी मुद्रा आय का 12% है। पिछले तीन दशकों में उन्होंने 25 से अधिक प्रभावशाली बासमती किस्में विकसित कीं, जिससे किसानों की आय स्थिर हुई और शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुंच बेहतर हुई।

साधारण किसान परिवार से राष्ट्रीय सम्मान तक का सफर

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के बरहट गांव के एक साधारण किसान परिवार में डॉ. सिंह का जन्म हुआ था, उन्होंने बचपन से ही खेतों में काम किया और इन्हीं खेतों में अनाज साफ करने से लेकर कृषि अनुसंधान के शीर्ष पदों तक का सफर तय किया। वे IARI के पूर्व निदेशक और कुलपति भी रहे हैं। विदेश में अवसर ठुकराकर देश सेवा को प्राथमिकता देने वाले डॉ. सिंह को 2026 में पद्मश्री (विज्ञान एवं इंजीनियरिंग) से सम्मानित किया गया। इससे पहले उन्हें 2012 में बोरलॉग अवॉर्ड, 2013 में रफी अहमद किदवई पुरस्कार और 2017 में ओम प्रकाश भसीन अवॉर्ड मिल चुका है।

यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों के बीच कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। स्काइमेट, जो किसानों के लिए काम करने वाली मौसम सलाहकार कंपनी है, इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करती है। यह सम्मान दिखाता है कि समर्पित वैज्ञानिक शोध न केवल निर्यात बढ़ाता है, बल्कि करोड़ों किसानों के जीवन को भी बेहतर बनाता है। इसके साथ ही ऐसे प्रयास भारत की कृषि स्थिति को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाते हैं।

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Arti Kumari
Content Writer (English)
With a strong foundation in science and a constant drive for research, Arti brings depth and clarity to weather and climate storytelling at Skymet Weather. She translates complex data into compelling narratives, leading Skymet’s digital presence with research-backed, impactful content that informs and inspires audiences across India and beyond.
FAQ

बासमती चावल में उनके क्रांतिकारी वैज्ञानिक योगदान के लिए।

डॉ. अशोक कुमार सिंह पुसा बासमती 1121 और पुसा बासमती 1509 किस्में सबसे प्रसिद्ध हैं।

डॉ. अशोक कुमार सिंह के शोध से किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और स्थिर आय मिली है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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