अगले तीन दिन सिर्फ केरल में बरसेंगे बादल, बाकी देश रहेगा शुष्क
मुख्य मौसम बिंदु
- फरवरी के अंत तक देश में मौसम गतिविधि नहीं।
- केरल में 25-28 फरवरी के बीच बारिश के आसार।
- दक्षिण भारत में प्री-मानसून के संकेत और बढ़ता तापमान।
- उत्तर-दक्षिण पवन असंगति और कमजोर चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय।
फरवरी के बाकी दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम गतिविधियाँ बेहद कम रहने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर के ज्यादा ऊंचाई वाले क्षेत्रों और अरुणाचल प्रदेश के पर्वतीय भागों को छोड़कर, केरल के अलावा देश के किसी भी हिस्से में मौसम गतिविधि की उम्मीद नहीं है। केरल में पिछले 3-4 दिनों से छिटपुट बारिश और गरज-चमक हो रही है, जो फरवरी के अंत तक जारी रह सकती है।
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प्री-मानसून की आहट: तमिलनाडु और केरल में बढ़ रही गर्मी
तमिलनाडु और केरल में दिन का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जो प्री-मानसून मौसम का संकेत माना जाता है। दक्षिणी प्रायद्वीप के आंतरिक हिस्सों में कुछ अन्य मौसमी हलचलें भी बन रही हैं, लेकिन सामान्य प्री-मानसून जैसी परिस्थितियाँ बनने में अभी थोड़ा समय लगेगा। इरोड, सलेम, परमाथी, कोचीन और पुनालूर में गर्मी तेज हो रही है। इरोड (तमिलनाडु) में कल 24 फरवरी को अधिकतम तापमान 37.8°C दर्ज किया गया, जो सबसे अधिक रहा। इन सभी स्थानों पर पिछले 24 घंटों में तापमान 35°C से ऊपर दर्ज हुआ। मौसम का यह पैटर्न इस सप्ताह भी जारी रहने की संभावना है।
प्री-मानसून की प्रमुख विशेषता
दक्षिण भारत के अंदरूनी भागों में उत्तर-दक्षिण पवन असंगति (विंड डिसकॉन्टिन्यूटी) प्री-मानसून की एक प्रमुख विशेषता मानी जाती है। यह असंगति विदर्भ से लेकर देश के दक्षिणी सिरे तक फैली हुई है, जो आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा और तमिलनाडु-केरल की सीमा से होकर गुजर रही है। फिलहाल यह प्रणाली शुरुआती अवस्था में है, लेकिन मार्च की शुरुआत में इसके अधिक मजबूत होने की संभावना है।
उत्तर-दक्षिण पवन असंगति (विंड डिसकॉन्टिन्यूटी) क्या है?
जब अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवाएं एक सीधी रेखा में मिलती हैं और उनके बीच टकराव या बदलाव की स्थिति बनती है, तो उसे उत्तर-दक्षिण पवन असंगति कहते हैं। सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि यह वह लाइन होती है जहां उत्तर की ओर से आने वाली हवाएं और दक्षिण की ओर से आने वाली हवाएं मिलती हैं। इस वजह से बादल बनते हैं, गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। यह स्थिति खासकर दक्षिण भारत में प्री-मानसून के समय ज्यादा देखने को मिलती है।
अरब सागर में चक्रवाती परिसंचरण से केरल में बारिश
दक्षिण-पूर्व अरब सागर और उत्तर केरल तट के पास निचले स्तर पर एक कमजोर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके साथ ही उत्तर-दक्षिण पवन असंगति (north-south wind discontinuity) के प्रभाव से पिछले तीन दिनों में केरल में अधिक और आंतरिक तमिलनाडु में कहीं-कहीं बारिश व गरज-चमक की गतिविधियाँ देखी गई हैं। कोझिकोड, त्रिशूर, कोचीन, पुनालूर और तिरुवनंतपुरम में पिछले 3-4 दिनों के दौरान प्री-मानसून की अच्छी शुरुआती बारिश दर्ज हुई।
28 फरवरी तक केरल में बारिश
उत्तर-दक्षिण पवन असंगति की खासियत है कि यह पूर्व-पश्चिम दिशा में स्थान बदलती रहती है, जिससे मौसम गतिविधियों का क्षेत्र भी बदलता है। फिलहाल यह असंगति पश्चिम की ओर खिसककर केरल के आंतरिक भागों के करीब, लेकिन तट से दूर स्थित है। दक्षिण-पूर्व अरब सागर के चक्रवाती परिसंचरण और पवन असंगति के संयुक्त प्रभाव से 25 से 28 फरवरी 2026 के बीच केरल में छिटपुट से मध्यम बारिश और गरज-चमक जारी रहने की संभावना है। यही एकमात्र क्षेत्र होगा जहां फरवरी के शेष दिनों में मौसम गतिविधियां(बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक) देखने को मिलेंगी।
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