नेपाल के सिद्धार्थनगर में 24 घंटे में 400 मिमी तक बारिश संभव, भारत के सीमावर्ती जिलों पर भी खतरा- स्काईमेट पूर्वानुमान

By: Arti Kumari | Edited By: Mohini Sharma
Jul 8, 2026, 7:30 PM
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मौसम पूर्वानुमान, फोटो: AI Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • नेपाल के सिद्धार्थनगर (भैरहवा) में 24 घंटे में करीब 400 मिमी बारिश का संकेत।
  • बंगाल की खाड़ी के निम्न दबाव क्षेत्र और सक्रिय मानसून ट्रफ से बढ़ेगी बारिश।
  • उत्तर प्रदेश के महराजगंज और सिद्धार्थनगर जिलों पर भी असर पड़ सकता है।
  • नेपाल पहले भी 500–600 मिमी से अधिक दैनिक वर्षा की घटनाएं देख चुका है।
  • पूर्वानुमान वैधता: 11 से 14 जुलाई 2026 के बीच संभावित मौसम गतिविधि पर आधारित।

मौसम पूर्वानुमान कई बार सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ पूर्वानुमान ऐसे होते हैं जो मौसम वैज्ञानिकों को भी गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर देते हैं। स्काईमेट द्वारा विश्लेषित नवीनतम मौसम मॉडल (Numerical Weather Guidance) ऐसे ही एक असाधारण संकेत दे रहे हैं। मॉडल के अनुसार 11 से 14 जुलाई के बीच नेपाल के लुंबिनी प्रांत के रूपन्देही जिले के मुख्यालय सिद्धार्थनगर (भैरहवा) में 24 घंटे के भीतर लगभग 400 मिमी बारिश हो सकती है। कुछ मॉडल इससे भी अधिक वर्षा का अनुमान लगा रहे हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह नेपाल के तराई क्षेत्र में आधुनिक मौसम रिकॉर्ड के सबसे बड़े 24 घंटे के वर्षा घटनाओं में शामिल हो सकता है।

सिद्धार्थनगर में इतनी भारी बारिश क्यों?

रूपन्देही जिला नेपाल के तराई क्षेत्र में स्थित है और हिमालय की तलहटी के बेहद करीब है। सक्रिय मानसून के दौरान अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरपूर दक्षिण-पश्चिमी हवाएं चुरिया और महाभारत पर्वत श्रृंखलाओं से टकराकर तेजी से ऊपर उठती हैं। इस प्रक्रिया के कारण हिमालय की तलहटी के संकरे क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होती है। इस बार बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) और सक्रिय मानसून ट्रफ के कारण 11 से 14 जुलाई के बीच नमी का एक नया और मजबूत प्रवाह इसी क्षेत्र पर केंद्रित होने की संभावना है। इसी वजह से सिद्धार्थनगर-रूपन्देही क्षेत्र में अत्यधिक बारिश का जोखिम बढ़ गया है।

सामान्य मानसून में भी हो सकती हैं रिकॉर्ड बारिश की घटनाएं

मानसून पूरे मौसम में हर जगह समान बारिश नहीं करता। सबसे ज्यादा वर्षा अक्सर कुछ दिनों तक सक्रिय रहने वाले निम्न दबाव क्षेत्रों और मानसून ट्रफ से जुड़ी प्रणालियों के दौरान होती है। यही कारण है कि भले ही स्काईमेट के 2026 मानसून पूर्वानुमान में पूरे सीजन की बारिश सामान्य या सामान्य से थोड़ी कम रहने का अनुमान हो, फिर भी कुछ स्थानों पर रिकॉर्डतोड़ बारिश हो सकती है। नेपाल में सालाना वर्षा का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के बीच होता है और इसका बड़ा भाग कुछ बेहद तेज बारिश वाले दिनों में ही दर्ज होता है।

नेपाल पहले भी हुई है भयंकर बारिश, भारत पर भी पड़ेगा असर

नेपाल में पिछले तीन दशकों के दौरान कई रिकॉर्ड बारिश की घटनाएं हो चुकी हैं। जुलाई 1993 में तिस्तुंग में 24 घंटे में 540 मिमी, अगस्त 2017 में हेटौडा में 516.2 मिमी और जुलाई 2024 में दोधारा में 624 मिमी वर्षा दर्ज हुई थी, जो 1946 के बाद नेपाल की सबसे अधिक दैनिक वर्षा थी। इन घटनाओं से भारी बाढ़ आई थी। अगर इस बार सिद्धार्थनगर में 400 मिमी के आसपास बारिश होती है, तो वहां शहरी बाढ़ का खतरा काफी बढ़ जाएगा क्योंकि तेजी से हुए शहरी विकास के कारण प्राकृतिक जल निकासी प्रभावित हुई है। इसका असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहेगा। नेपाल की चुरिया पहाड़ियों से निकलने वाली नदियां तेजी से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती हैं। ऐसे में महराजगंज और सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती भारतीय जिलों में भी बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ सकता है।

आगे के दिनों के लिए पूर्वानुमान

मौजूदा मौसम मॉडल के अनुसार 11 से 14 जुलाई के बीच किसी एक 24 घंटे की अवधि में नेपाल के सिद्धार्थनगर (भैरहवा)–रूपन्देही क्षेत्र में लगभग 400 मिमी बारिश होने की संभावना है। अंतिम रूप से दर्ज वर्षा 400 मिमी तक पहुंचे या इससे कुछ कम रहे, लेकिन मौसम मॉडल इस क्षेत्र में असाधारण रूप से भारी वर्षा की मजबूत संभावना दिखा रहे हैं। इसलिए नेपाल-भारत सीमा के दोनों ओर आपदा प्रबंधन एजेंसियों को इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता है।

हालांकि, स्काईमेट यह स्पष्ट करता है कि यह आंकलन मौसम मॉडल पर आधारित है और अत्यधिक स्थानीय बारिश के पूर्वानुमान में समय, स्थान और तीव्रता में बदलाव संभव है। इसलिए नेपाल के Department of Hydrology and Meteorology (DHM) तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आधिकारिक अपडेट पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।

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Arti Kumari
Content Writer (English)
With a strong foundation in science and a passion for research, Arti specializes in weather and climate communication. At Skymet Weather, she leads the company's digital content strategy, transforming complex meteorological data into clear, engaging narratives. Her research-backed storytelling has helped expand Skymet's digital reach while making weather and climate information accessible to millions of readers across India and beyond.
FAQ

लुंबिनी प्रांत के रूपन्देही जिले के सिद्धार्थनगर (भैरहवा) क्षेत्र में 11 से 14 जुलाई के बीच 24 घंटे में लगभग 400 मिमी बारिश होने की संभावना है।

हां, नेपाल से निकलने वाली नदियां उत्तर प्रदेश के महराजगंज और सिद्धार्थनगर जिलों में बहती हैं, इसलिए भारी बारिश से इन क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ सकता है।

नहीं, यह मौसम मॉडल पर आधारित पूर्वानुमान है। अत्यधिक स्थानीय वर्षा के मामलों में समय, स्थान और बारिश की मात्रा में बदलाव संभव है, इसलिए आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है