दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एक्टिव, तमिलनाडु–केरल में भारी बारिश का अलर्ट
मुख्य मौसम बिंदु
- श्रीलंका के पास लो प्रेशर सिस्टम सक्रिय
- अगले 3–4 दिन दक्षिण भारत प्रभावित
- तमिलनाडु और केरल में बढ़ेगी बारिश
- 23 फरवरी से मौसम साफ होने की उम्मीद
श्रीलंका और उससे सटी बंगाल की खाड़ी (BoB) पर बना निम्न दबाव क्षेत्र अब पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में खिसककर दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और भूमध्यरेखीय क्षेत्र पर पहुंच गया है। यह सिस्टम अभी भी श्रीलंका के काफी नजदीक बना हुआ है। इसके असर से देश के दक्षिण-पूर्वी तट पर भारी बारिश दर्ज की गई है। बतिकलोआ में 24 घंटों में 129 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। आगे भी श्रीलंका के अधिकतर हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इसका प्रभाव अगले 3–4 दिनों में दक्षिण तमिलनाडु और केरल तक पहुंचेगा।
अगले 24 घंटों में सिस्टम होगा मजबूत, कोमोरिन क्षेत्र की ओर बढ़ेगा असर
निम्न दबाव क्षेत्र अगले 24 घंटों में और ज्यादा मजबूत होने और पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि मौसम की मुख्य गतिविधियां श्रीलंका के ठीक दक्षिणी हिस्से के समानांतर रहेंगी और कोमोरिन क्षेत्र से होते हुए आगे Maldives की तरफ बढ़ेंगी। अनुमान है कि यह सिस्टम दक्षिण अरब सागर के अंदर गहराई तक नहीं जाएगा, बल्कि भूमध्यरेखीय क्षेत्र के पास ही रहेगा और मालदीव, कोमोरिन तथा श्रीलंका के बीच ही घूमता रहेगा।
19 से 22 फरवरी: तमिलनाडु और केरल में बढ़ेगी बारिश की गतिविधि
19 से 22 फरवरी के बीच तमिलनाडु और केरल में बिखरी हुई बारिश की संभावना है। शुरुआत में 19 फरवरी को तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तटीय इलाकों में हल्की बारिश शुरू होगी। 20 फरवरी को बारिश का दायरा बढ़ेगा और दक्षिण तमिलनाडु के अंदरूनी भागों तथा केरल में हल्की से मध्यम बारिश और बौछारें पड़ सकती हैं। 21 और 22 फरवरी को वर्षा का क्षेत्र और तीव्रता दोनों बढ़ने के आसार हैं।
वीकेंड पर दक्षिणी तटीय इलाकों में तेज बारिश, 23 फरवरी से राहत
21 और 22 फरवरी के वीकेंड पर प्रायद्वीपीय भारत के दक्षिणी सिरे पर दोनों तटों के आसपास अच्छी बारिश देखने को मिलेगी, जो अधिकतर 10°N अक्षांश के दक्षिणी भागों तक सीमित रहेगी। पंबन, तूतीकोरिन, टोंडी, पलायमकोट्टई, अतीरामपट्टिनम, पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम, अलाप्पुझा, पुनलूर, त्रिशूर, कोट्टायम और कोचीन में भारी बारिश की संभावना है। 23 फरवरी से मौसम में व्यापक सुधार शुरू होगा। इसके बाद बारिश की गतिविधियां घटेंगी और महीने के बाकी दिनों में केवल कुछ जगहों तक सीमित रह जाएंगी।
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