Monsoon Alert: पश्चिमी प्रशांत के टाइफूनों ने रोकी बंगाल की खाड़ी में मानसूनी सिस्टम की राह
मुख्य मौसम बिंदु
- जून के अंतिम सप्ताह तक बंगाल की खाड़ी में कोई मानसूनी सिस्टम नहीं।
- मानसून की उत्तरी सीमा हरनाई और मुजफ्फरपुर के पास रुकी है।
- टाइफून मेखखाला और हिगोस से बंगाल की खाड़ी की हवाओं का पैटर्न प्रभावित
- जुलाई की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी में पहले लो प्रेशर एरिया की संभावना।
- पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम पूर्वानुमान अगले 7 से 10 दिनों तक मान्य है।
बंगाल की खाड़ी में अब तक नहीं बना कोई मानसूनी सिस्टम, जुलाई की शुरुआत में बन सकता है पहला लो प्रेशर एरिया
जून के अंतिम सप्ताह तक भी बंगाल की खाड़ी शांत, मानसून की रफ्तार पर पड़ा असर
जून का अंतिम सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में अब तक एक भी मानसूनी मौसम प्रणाली विकसित नहीं हुई है। आमतौर पर ये सिस्टम मानसून को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके अभाव में मानसून की प्रगति देश के दोनों तटीय क्षेत्रों पर धीमी पड़ गई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) 8 जून से महाराष्ट्र के हरनाई क्षेत्र के आसपास लगभग दो सप्ताह तक रुकी रही। अब इसके उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे यह कोंकण के शेष हिस्सों, मुंबई और दक्षिणी तटीय गुजरात तक पहुंच सकता है। हालांकि इसकी रफ्तार अभी भी सामान्य से धीमी रहने की संभावना है।
तूफान, सैटेलाइन इमेज
पूर्वी भारत में भी मानसून की चाल धीमी
देश के पूर्वी हिस्से में भी मानसून की प्रगति संतोषजनक नहीं है। मानसून की उत्तरी सीमा 12 जून से बिहार के मुजफ्फरपुर के आसपास रुकी हुई है और आगे बढ़ने में संघर्ष कर रही है। अगले कुछ दिनों तक इसके इसी क्षेत्र में बने रहने की संभावना है। मानसून जून के अंतिम दिनों या जुलाई की शुरुआत में ही आगे बढ़ पाएगा। हालांकि इस दौरान यह देश के कुछ मध्य हिस्सों में धीरे-धीरे आगे बढ़ सकता है।
तूफान हिगोस, सैटेलाइट इमेज
पश्चिमी प्रशांत महासागर में सक्रिय हैं दो शक्तिशाली तूफान
फिलिपींस सागर के पूर्वी भाग में इस समय शक्तिशाली टाइफून ‘मेखखाला’ (Mekkhala) सक्रिय है। यह तूफान पहले उत्तर और बाद में उत्तर-पूर्व दिशा में मुड़ते हुए कमजोर पड़ने लगेगा। इसके जापान के ओकिनावा द्वीप के दक्षिणी हिस्सों के करीब पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा मारियाना द्वीप समूह के पास ‘हिगोस’ (Higos) नाम का एक अन्य टाइफून भी सक्रिय है, जो मेखखाला के पीछे-पीछे आगे बढ़ रहा है। यह तूफान भी समुद्र के ऊपर उत्तर-पूर्व दिशा में मुड़ते हुए जापान के होंशू द्वीप के करीब पहुंच सकता है।
मेखखाला तूफान
टाइफून के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी में मौसमीय गतिविधियाँ कमजोर
पश्चिमी प्रशांत महासागर और फिलिपींस सागर में सक्रिय ये दोनों तूफान काफी शक्तिशाली हैं। इनकी वजह से म्यांमार क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बहने वाली हवाओं का पैटर्न प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से उत्तर और पूर्वी बंगाल की खाड़ी में हवाओं की दिशा और गति में बदलाव देखने को मिला है। बंगाल की खाड़ी में एक कमजोर समुद्री व्यवधान मौजूद है, लेकिन इन दोनों टाइफून के प्रभाव के कारण यह मजबूत नहीं हो पा रहा है। अगले 4 से 5 दिनों में ये तूफान क्षेत्र से दूर चले जाएंगे, जिससे बंगाल की खाड़ी में मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल होने लगेंगी।
जुलाई की शुरुआत में बन सकता है पहला मानसूनी सिस्टम
मौजूदा संकेतों के अनुसार जून के अंतिम दिनों में बंगाल की खाड़ी में मौसमीय गतिविधियां संगठित होने लगेंगी। जुलाई की शुरुआत में उत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की संभावना है, जो इस मानसून सीजन का पहला मजबूत सिस्टम हो सकता है। फिलहाल इसके बनने की सटीक तारीख बताना जल्दबाजी होगी, इसलिए आने वाले दिनों में मौसमीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है। संभावना है कि यही सिस्टम पूर्वी और मध्य भारत के अंदरूनी हिस्सों में मानसून को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह भी पढ़ें: दिल्ली में मानसून की दस्तक में देरी, जून में आगमन की संभावना नहीं, जानें कब मिलेगी गर्मी से राहत?
यह भी पढ़ें: मुंबई पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून, अगले 7 दिन हल्की से भारी बारिश के आसार, जानें कहां ज्यादा बरसेंगे बादल ?






