मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी,देशभर में बढ़ा बारिश का घाटा, कब होगी बरसात की भरपाई?

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jul 17, 2026, 7:30 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • जून के अंत तक देश में बारिश का घाटा 40% तक पहुंच गया था।
  • 9 जुलाई तक घाटा घटकर 14% हुआ, लेकिन 16 जुलाई तक फिर 24% हो गया।
  • 17 से 24 जुलाई के बीच पूर्वी और मध्य भारत में अच्छी बारिश की संभावना।
  • एमपी, यूपी, दिल्ली और पूर्वी राजस्थान में बारिश बढ़ सकती है।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम पूर्वानुमान 17 जुलाई से 28 जुलाई 2026 तक प्रभावी है।

इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत जून महीने में काफी धीमी रही। मानसूनी हवाओं की रफ्तार कमजोर पड़ गई थी, जिससे पश्चिमी तट और देश के अंदरूनी हिस्सों में मानसून की प्रगति लंबे समय तक रुकी रही। इसी वजह से मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, लखनऊ, दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में मानसून सामान्य से काफी देर से पहुंचा। हालांकि, राजस्थान के अंतिम हिस्सों तक मानसून समय पर पहुँच गया, लेकिन बारिश बहुत कम हुई। जून के अंत तक पूरे देश में बारिश का कुल घाटा बढ़कर 40% तक पहुंच गया।

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फिर से बढ़ रहा बारिश का घाटा

जुलाई की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी में एक सक्रिय मानसूनी सिस्टम बनने के कारण देश के मुख्य मानसून क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई। इसका असर यह हुआ कि 9 जुलाई 2026 तक देशभर में बारिश का घाटा घटकर 14% रह गया। लेकिन इसके बाद यह मौसम प्रणाली कमजोर पड़ गई और 10 जुलाई से फिर बारिश कम होने लगी। 16 जुलाई तक पूरे देश में 1 जून से अब तक का कुल बारिश घाटा बढ़कर 24% हो गया। देश के चारों प्रमुख मौसमीय क्षेत्रों (उत्तर-पश्चिम, मध्य, दक्षिण और पूर्व-उत्तर-पूर्व) में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। जुलाई के पहले सप्ताह के बाद से मानसून की रफ्तार फिर धीमी पड़ गई है और फिलहाल इसमें जल्द सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं।

अगले कुछ दिन इन राज्यों में होगी अच्छी बारिश

इस बार मानसून कमजोर रहने की सबसे बड़ी वजह भारतीय समुद्री क्षेत्रों में पर्याप्त मौसम प्रणालियों का विकसित न होना है। पूरे सीजन में बंगाल की खाड़ी में केवल एक मजबूत सिस्टम विकसित हुआ। दूसरा सिस्टम, जो उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में बना था, अब कमजोर होकर सामान्य निम्न दबाव क्षेत्र बन गया है।

अब यह सिस्टम छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के आसपास और कमजोर होकर चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के रूप में अगले लगभग तीन दिनों तक बना रहेगा। इसकी प्रभाव रेखा विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश तक फैली हुई है। इसके प्रभाव से 17 जुलाई से 24 जुलाई 2026 के बीच बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश में अलग-अलग समय पर मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है।

तिब्बती हाई की सामान्य स्थिति में वापसी से बदलेगा मानसून का पैटर्न

फिलहाल 30,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर मध्य एशिया तथा उत्तर भारत-पाकिस्तान के ऊपर एक मजबूत उच्च दबाव (High Pressure) का क्षेत्र बना हुआ है। सामान्य परिस्थितियों में यह उच्च दबाव चीन और तिब्बत के ऊपर रहता है, जिसे 'तिब्बती हाई (Tibetan High)' कहा जाता है। इसकी सामान्य स्थिति भारतीय मानसून को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ऊपरी वायुमंडल में एक गहरी ट्रफ (Deep Trough) बनने के कारण यह हाई प्रेशर सिस्टम 23 जुलाई के आसपास पूर्व की ओर अपनी सामान्य स्थिति में लौटना शुरू करेगा और 24 से 25 जुलाई तक पूरी तरह सामान्य स्थिति में पहुंच सकता है। इसके बाद मौजूदा निम्न दबाव क्षेत्र का अवशेष भी पश्चिम की ओर बढ़ेगा, जिससे बारिश का क्षेत्र मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पूर्वी राजस्थान तक फैल जाएगा। इन इलाकों में 25 से 28 जुलाई के बीच अच्छी बारिश की संभावना है।

जुलाई के आखिर तक बारिश के घाटे में सुधार की उम्मीद

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 20 जुलाई के बाद देश में बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं। इससे बारिश के घाटे में अधिक बढ़ोतरी रुक सकती है। 24 से 28 जुलाई के बीच देशभर में बारिश में सुधार होने की संभावना है, जिससे मौसमी बारिश का घाटा कुछ हद तक कम हो सकता है। अनुमान है कि जुलाई महीने के अंत तक पूरे देश में बारिश का घाटा लगभग 10% रह सकता है। हालांकि इसमें ±5% का अंतर संभव है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

जुलाई की शुरुआत के बाद मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गईं, जिससे कई राज्यों में बारिश कम हुई और वर्षा घाटा बढ़ गया।

बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 24 से 28 जुलाई के बीच मानसून फिर सक्रिय हो सकता है और जुलाई के अंत तक देश का वर्षा घाटा लगभग 10% तक सिमट सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है